टीम भाजपा के लिए इस बार बहुमत नहीं हैं आसान!

२०१४ के लोकसभा चुनाव में उठी मोदी लहर ने सुनामी का स्वरूप ले लिया और एनडीए के बाकी किसी भी साथी के सपोर्ट के बिना ही भारतीय जनता पार्टी बहुमत सरकार बनाने की स्थिति में थी. लेकिन पिछले चार सालों में जनता के मन में क्या अंजस मंजस की स्थिति रही और हाल के मूड के हिसाब से देखें तो जाहिर तौर पर लगता हैं की वो रिजल्ट इस बार नहीं आयेंगे. और हाल ही में आये हुए कुछ सर्वे के रिजल्ट देख के भारतीय जनता पार्टी और उसके एनडीए सहयोगी को परेशानी हो सकती हैं.

कोंग्रेस ने एन मौके पर रिलीज की न्याय स्कीम की रुपरेखा ने भी एक हद तक वोट शेर को नुकशान किया हैं. फिर भी अभी कुछ कहना उचित नहीं हैं क्यूंकि जनता का मूड तो वो जब वोट कास्ट करेगा और रिजल्ट आयेंगे तभी पता चल पायेगा.

आइये हम हाल ही में आये हुए कुछ सर्वे के ऊपर नजर करें.

सी वोटर सर्वे:

एनडीए २६७ सीट्स
यूपीए १४२ सीट्स
अन्य १३४

CSDS एंड लोकनीति सर्वे:

एनडीए २६३ से २८३ सीट्स
यूपीए ११५ से १३५ सीट्स
अन्य १३५ से १५५ सीट्स

सीएनएक्स सर्वे

एनडीए २९५ सीट्स
यूपीए १२७ सीट्स
अन्य १२१ सीट्स

वीएमआर सर्वे

एनडीए २७९ सीट्स
यूपीए १४९ सीट्स
अन्य ११५ सीट्स

चुनाव के प्रथम फेज के लिए अब केम्पेन बंद हो चुके हैं और अब से कुछ घंटो के भीतर ही मतदान भी होगा. ऐसे में ये सर्वे कितने सटीक हैं वो जानने के लिए तो हम और आप को अभी एक महीने से भी ज्यादा वेट करनी होगी.

और भी कारण हैं चिंता के

बीजेपी के पास इन सर्वे के सिवा भी चिंता के अपने कुछ अलग ही कारण हैं. और उनमें सब से अहम हैं पार्टी का उपचुनावों में खस्ता हाल प्रदर्शन. साथ में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. २०१७ में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी के पास वो मार्जिन नहीं था जो उन्हें मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए मिला करता था.

इसके उपरांत उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बसपा के बिच में हुए गठबंधन से भी भाजपा के समीकरण बिगड़ सकते हैं जिसका अंदेशा अमित शाह और टीम को हैं ही. पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़ो पर नजर करें तो देखने को मिलता हैं की इस गठबंधन की स्थिति में भाजपा को ही सब से ज्यादा नुकशान होगा. और उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सब से ज्यादा ८० सीटें हैं. और इसलिए उत्तर प्रदेश के चुनाव में यदि भारतीय जनता पार्टी तीस या उस से कम सीटे लाती हैं तो केंद्र में वो अभी के जैसी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रहेगी.

दूसरा बड़ी दुविधा दक्षिण के राज्यों में भाजपा की खस्ता हाल स्थिति हैं. साथ ही में केरल सुनामी, आंध्रा स्पेशल पैकेज जैसे मुद्दों से भी पार्टी को नुकशान होने की स्थिति पैदा हो सकती हैं. उपरांत कर्णाटक में कोंग्रेस और जेडीएस का गठबंधन एक और ड्राबेक हैं पार्टी के लिए. यूपी के जैसे ही कर्नाटक में इन दो बड़ी पार्टी के मिल जाने से सीधा नुकशान बिजेपी को ही हो रहा हैं.

हिंदुत्व स्टेंड

भाजपा को २ सिट से पूर्ण बहुमत दिलाने में जिस चीज का सब से बड़ा योगदान रहा हैं उस मुद्दे से पार्टी का विमुख होना भी एक कारण हैं चिंता का. हिंद्त्व सपोर्टर परंपरागत वोट बैंक रहा हैं भारतीय जनता पार्टी का. लेकिन पिछले कुछ समय से कोंग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व और भाजपा का हार्ड से सॉफ्ट हिंदुत्व स्टेंड भी उसके लिए हानिकारक होता दिख रहा हैं.

राम मंदिर, आर्टिकल ३७० जैसे मुद्दों पर पार्टी ने अभी भी अपना स्टैंड क्लियर नहीं किया हैं. और एक बड़े तबके को लगता था की पार्टी २०१९ के चुनाव में जाने से पहले राम मंदिर के लिए संसद में आर्डिनेंस लाएगी. और ऐसा ना होने पर इस वोट बैंक का उखड़ना उचित भी हैं.

इकॉनमी आउट ऑफ़ कंट्रोल

नोटबंदी, जीएसटी जैसे कठोर निर्णयों के बाद भी इकॉनमी में जो सुधार की आशा भाजपा और उसके बाकी एनडीए घटक दलों को थी वैसा हुआ नहीं. जीडीपी के आंकड़े काउंटिंग व्यवस्था बदलने पर भी खस्ताहाल ही रहे हैं. पेट्रोल की बढती कीमतें, महंगाई और बेंकों में बढ़ते एनपीए भी एक कारण हैं बीजेपी की चिंता का.

राफेल का भूत

राफेल विमान में भ्रष्टाचार के सवालों को भाजपा जितना दबाती हैं वो उतना ही उभर के आता हैं. अभी आज के ही सुप्रीम कोर्ट के फेंसले से भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलों में और बढ़ोतरी हुई हैं. सुप्रीम कोर्ट के तिन जजों की बेंच ने चोरी किये हुए दस्तावेजों को कोर्ट की कार्यवाही में मान्य करार दे दिया हैं. और ऐसी स्थिति में अब एनडीए ये नहीं कह सकती की उन्हें सर्वोच्च न्यायलय से क्लीन चिट मिल गई हैं.

तो ये कुछ मुद्दे हैं जिसकी वजह से भाजपा का इस बार के २०१९ लोकसभा चुनावों में बहुत हांसिल करने के मनसूबे पर ब्रेक लगा सकते हैं. देखते हैं की चाणक्य अमित शाह और उनकी टीम कैसे इन सब मुद्दों का समाधान कर के जनता को अपने पक्ष में वोटिंग के लिए मना पाती हैं.

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