सातवें फेज के उम्मीदवारों में सब से ज्यादा दागी बीजेपी के!

क्या हुए तेरा वादा

२०१४ के अप्रेल महीने का ये वीडियो देखें जो मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले का हैं. इसमें वो कह रहे हैं की वो प्रधानमंत्री बनने पर पहले एक कमिटी का गठन करेंगे और वो किसी भी क्रिमिनल पॉलिटिशियन को नहीं छोड़ेंगे चाहें वो खुद उनकी पार्टी के ही क्यूँ ना हो. उन्होंने कहा था की मैं सुप्रीम कोर्ट को पॉलिटिशियन के केस फास्ट ट्रेक में चला के पार्लियामेंट को पहले साफ़ करेंगे!

लेकिन २०१९ के चुनाव भी अनकरीब ख़तम होने को हैं लेकिन अपने बहुत सब वादों की तरह शायद मोदी जी अपने इस वादे को भी भूल चुके हैं. वैसे भूल तो देश की जनता भी जाती हैं. लेकिन बात याद इसलिए आई की एक अजीब बात सामने आई की सातवें फेज में जो कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं २०१९ में. वो सभी में सब से ज्यादा दागी पॉलिटिशियन फिलहाल तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ही टिकट पाए हुए हैं! इसलिए एक बार फिर से कथनी और करनी में बड़ा अंतर देखने को मिला हैं.

तो क्या अब कमिटी २०१९ चुनावों के बाद बनाएगी बीजेपी?

सातवें फेज के कैंडिडेट्स की जो एसोसिएशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक रिफोर्म्स (ADR) की रिपोर्ट आई हैं वो लोकशाही के लिए बेहद शर्मसार करने वाली हैं. रिपोर्ट के आंकड़ो पर गौर किया जाए तो बीजेपी के करीब आधे कैंडिडेट जो २०१९ चुनाव के आखरी चरण में मत के लिए अपील कर रहे हैं वो दागी हैं और उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ इन केसों को जाहिर किया हुआ हैं. बीजेपी के कुल ४३ कैंडिडेट्स हैं जिसमे से १८ के खिलाफ पेंडिंग केस हैं.

कुल मिला के ९०९ कैंडिडेट्स सातवें फेज के इलेक्शन में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं इसमें से १७० ने हलफनामे में अपने खिलाफ केस होने की बात चुनाव आयोग को बताई हैं.

दूसरी पार्टियों की बात करें तो बहुजन समाजवादी पार्टी के ३९ में से ४ कैंडिडेट, कोंग्रेस के ४५ में से १० कैंडिडेट, ३१३ में से २४ स्वतंत्र कैंडिडेटस ने अपने खिलाफ केस की बात हलफनामे में मानी हैं.

इन सब केसों में १२ कैंडिडेट के ऊपर मर्डर यानी की खून की आईपीसी धारा ३०२ में मामले दर्ज हैं. ३४ कैंडिडेटस के ऊपर अटेम्प्ट टू मर्डर यानी की खून करने की कोशिश के मामने में आईपीसी की धारा ३०७ के तहत मामले दर्ज हैं. ७ कैंडिडेट्स के खिलाफ आईपीसी की धारा ३६३, ३६४, ३६५ के तहत किडनेपिंग यानी की अपहरण, खून करने के इरादे से अपहरण करने के मामले दर्ज हैं.

सभी दागी कैंडिडेट्स में से २१ के खिलाफ महिलाओं के खिलाफ जुर्म के मुकदमे दर्ज हैं. जिसमे महिलाओं के ऊपर हमले या गुनाहित प्रवृत्ति से उनकी लज्जा से खिलवाड़ (आईपीसी ३५४), दहज के रिलेटेड मृत्यु (आईपीसी ३०४B), औरत के पति या ससुराल के किसी रिश्तेदार द्वारा उसके ऊपर शारीरिक या मानसिक जुल्म (आईपीसी ४९८A), आईपीसी की धारा ५०९ के तहत शब्द, कार्य या इशारे से औरत की मॉडेस्टी से खिलवाड़ के केस दर्ज हैं.

२ कैंडिडेटस ने अपने हलफनामे में खुद के खिलाफ रेप यानी की बलात्कार की धारा ३७६ होने का जिक्र किया हैं. और १० कैंडिडेटस ने खुद के खिलाफ हेट स्पीच के केस होने का माना हैं.

ADR की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ सातवें फेज में कुल ३३ रेड लाईट कांस्टीट्युअंसी हैं. रेड अलर्ट कांस्टीट्युअंसी उसे कहा जाता हैं जिसमे ३ या उस से अधिक गुनाहित इतिहास वाले कैंडिडेट चुनाव लड़ते हैं.

ADR की ये रिपोर्ट उन्होंने सातवें फेज में भाग ले रहे उम्मीदवारों के ९१८ में से ९०९ चुनावी हलफनामो का आकलन किया उसके ऊपर आधारित हैं.

जीते कोई भी पार्टी लेकिन ये आंकड़ो को देख के एक बात तो साफ़ हैं की मोदी ने कहा ऐसी कमिटी का गठन कर के ऐसे उम्मीदवारों और राजकारणीयों को पार्लियामेंट से दूर रखना बेहद जरुरी हो गया हैं. हो सकता हैं की कुछ के खिलाफ संगीन मामले बदले की भावना से और राजीनीतिक द्वेष से भी दर्ज कराये गए हों. वैसे मामलो को फास्ट ट्रेक में जांच कर के उसका निवारण लाना भी जरुरी हैं.

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