क्या ये १२ सेलेब्रिटी कैंडिडेट भी हार रहे हैं लोकसभा के चुनावों में?

लोकसभा २०१९ के चुनावों का एग्जिट पोल बहार आ गया हैं. ज्यादातर चेनल्स ने एनडीए अलायन्स के जितने की राह एकदम आसान बना दी हैं. और पिक्चर अब से कुछ ही घंटो में क्लियर होने लगेगा की कौन जित रहा हैं और कौन हार रहा हैं. लेकिन इस इलेक्शन के एग्जिट पोल्स में कुछ सीटों की भविष्यवाणी ने कुछ सेलेब्रिटी चहरो के ऊपर सलवटें ला के खड़ी कर दी हैं. ये १३ ऐसी सीटें हैं जहाँ से लड़ने वाले सेलेब्रिटी को अभी तक के सर्वे के मुताबिक़ या तो हार मिल रही हैं या उनकी अपने राजकीय प्रतिद्वंदी से कड़ी और नजदीकी टक्कर होने के आसार हैं.

१) उर्मिला मांतोडकर

उर्मिला मांतोडकर क्या नार्थ मुंबई हार के लोकसभा चुनाव जायेंगी?

मुंबई नार्थ की सिट २०१४ में बीजेपी के गोपाल शेट्टी ने ऑलमोस्ट साड़े चार लाख वोटों से जीती थी. और इस बार उनके सामने कोंग्रेस ने अपनी स्टार कैंडिडेट बोलीवुड की अभिनेत्री उर्मिला मांतोडकर को उतारा था.लेकिन इस सिट पर उर्मिला की राह आसान नहीं लग रही. और सर्वे गोपाल शेट्टी के ही विजय तिलक की और इशारा कर रहे हैं.

२) डिम्पल यादव

डिम्पल यादव को सुब्रत पाठक दे रहे हैं एकदम कड़ी टक्कर कन्नौज लोकसभा सिट पर

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी श्रीमती डिम्पल यादव के लिए भी इस बार जित की राह मुश्किल सी लग रही हैं. कन्नौज से सपा के टिकट पर लड़ रही डिम्पल का मुकाबला बीजेपी के सुब्रत पाठक से हैं. पिछली बार सुब्रत केवल २०००० मतों से हारे थे. और उनकी माने तो उन्होंने वो अंतर इस बार के इलेक्शन में कवर कर लिया हैं. और चुनावी सर्वे भी सुब्रत के साथ हैं इसलिए डिम्पल को बेस्ट ऑफ़ लक!

३) मुलायम सिंह यादव

मुलायम सिंह यादव के लिए भी २०१९ के इलेक्शन कठोर हैं!

उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय की राजनीति के कद्दावर नेता और यूपी की राजकीय बागडौर के बड़े खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव के लिए भी इस इलेक्शन में पसीने छूटने को हैं. बहु डिम्पल की तरह ही उनके ससुर के लिए भी मैनपुरी की सिट पर जित अब उतनी आसान नहीं लग रही हैं. भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य उन्हें बड़ी टक्कर देते हुए दिख रहे हैं.

४) राज बब्बर कर पायेंगे सिक्री फ़तेह?

राज बब्बर से ना होगा फतेहपुर सिरी का किल्ला फतह

फतेहपुर सिक्री से कोंग्रेस के कैंडिडेट और कोंग्रेस के यूपी के बड़े सेलेब्रिटी नेता राज बब्बर के लिए भी इस बार के चुनाव में दम निकालने का सिन खड़ा हुआ हैं. यहाँ सिर्फ दो चुनाव हुए हैं जिसमे २००९ के चुनाव में बसपा और २०१४ में भाजपा जीती थी. इस बार भी कोंग्रेस को शायद यहाँ अपना ओपनिंग स्टेंड ना मिले क्यूंकि एग्जिट पोल तो कुछ ऐसा ही कहते हैं!

५) राहुल गांधी

क्या राहुल गांधी कोंग्रेस की परंपरागत सिट अमेठी हार रहे हैं?

अगर कोंग्रेस ने अमेठी की सिट को गंवा दी तो ना सिर्फ कोंग्रेस बल्कि राहुल गांधी की राजीनीतिक भविष्य के ऊपर ये दाग शायद फिर कभी न धुल सके. परंपरागत सिट जहाँ कोंग्रेस के परिवार के वंशज जीतते रहे हैं वहां शायद इस बार स्मृति इरानी ने अपने वजूद को साबित किया हैं. एक बात तो हैं की २०१४ के इलेक्शन में हारने के बाद भी स्मृति ने यहाँ के दौरे नहीं छोड़े. शायद वो सब उनके पालें में जाए और उन्हें जित मिले! शायद राहुल गांधी को भी इस बात का अंदेशा था इसलिए वो वायानड से भी चुनाव लड़ें.

६) शत्रुध्न की शॉटगन क्या हुई मिसफायर?

शत्रुध्न सिन्हा भी एग्जिट पोल में पिछड़े पटना साहिब से

पार्टी में रहते हुए भी बीजेपी और मोदी के आलोचक शत्रुध्न सिन्हा ने लोकसभा २०१९ के चुनावों से ठीक पहले पार्टी बदल के कोंग्रेस का दामन थामा. और वो पटना साहिब से कोंग्रेस के टिकिट पर चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन एग्जिट पोल्स में उनकी सिट हाथ से जाती दिख रही हैं.

७) मिसा भारती

मिसा भारती हार रही हैं लोकसभा चुनाव २०१९

लालू यादव की पुत्री मिसा भारती के लिए पाटलीपुत्र में राम कृपाल यादव का मुकाबला शायद रास नहीं आएगा. एग्जिट पोल्स में वो पिछड़ती हुई नजर आ रही हैं.

८) आतिशी मार्लेना

आतिशी मार्लेना के लिए भी ईस्ट दिल्ली में कपरे चढ़ान हैं

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की राजनीती में पिछले कुछ सालों से टॉप टियर में जिसका नाम हैं वो आतिशी (सिंह) मार्लेना ने इस्ट दिल्ली से बीजेपी के गौतम गंभीर के खिलाफ अपनी किस्मत आजमाई है. लेकिन पिछली बार की तरह ही इस बार भी दिल्ली की सभी सीटों पर बीजेपी के जितने के एग्जिट पोल्स हैं. ऐसे में देखते हैं की क्या एजुकेशन के क्षेत्र में अपने काम के बदौलत आतिशी क्या पार्लिअमेंट की आवाज बन सकती है या नहीं.

९) एच डी देवगौड़ा

एच डी देवगौड़ा के लिए तुमकुर पर जितना बहुत मूश्किल सा हैं

तुमकुर की सिट पर सिटिंग एमपी मुद्दाहनुमेंगौडा को भले ही समझा के उनका निजी कैंडिडेट वाला नामांकन वापस करवा लिया गया हो लेकिन फिर भी यहाँ से पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा के लिए जित उतनी सहज नहीं लग रही हैं. एग्जिट पोल्स उन्हें बीजेपी के कैंडिडेट के साथ साथ देख रहे हैं और पलड़ा किसी भी तरफ झुक सकता हैं.

१०) दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह भोपाल से जितने पर खुद दुविधा में हैं

भोपाल पर दिग्विजय के जितने पर डाउट क्रिएट होने के बहुत कारण हैं. पहला ये की ये भाजपा की परम्परागत सिट रही हैं. दूसरा ये की भाजपा ने यहाँ के कैंडिडेट के तौर पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उतारा जो वीआईपी कैंडिडेट साबित हुई हिंदुत्व के मुद्दे के लिए. और तीसरा ये की मध्यप्रदेश लोकसभा में बीजेपी के लिए वोट करता रहा हैं. साधू संतो का साथ ले के देखते हैं की क्या इस बार दिग्विजय सिंह इन सब पहलुओं को जूठला के जित का डंका बजा पाते हैं की नहीं.

११) कन्हैया कुमार

गिरिराज सिंह अग्रेसर लग रहे हैं बेगुसराय में

पिछले कुछ वर्षो से जेएनयु काण्ड की वजह से चर्चित कन्हैया कुमार ने बेगुसराय से सीपीआई के टिकिट पर किस्मत आजमाई हैं. लेकिन गिरिराज सिंह के खिलाफ वो शायद ही जित पाए ऐसा एग्जिट पोल्स का दावा हैं.

१२) जया प्रदा

आजम खान रामपुर में जया प्रदा पर भारी पड़ते हुए लग रहे हैं

चुनावी भाषणों में तनातनी और आक्षेपबाजी देखी ही होगी आपने इन दोनों के बिच. अब रामपुर में हुए चुनावों में भी कांटे की टक्कर हैं दोनों के बिच में. लेकिन इस सिट का इतिहास आजम खान के पल्ले में हैं. देखते हैं की क्या जया कुछ करिश्मा कर पाई हैं क्या!

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